इसलिए देवकी ने प्रार्थना की, "कई लाखों वर्षों के बाद, जब भगवान ब्रह्मा अपने जीवन के अंत में पहुँचते हैं, तो ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति का विनाश हो जाता है। उस समय पाँच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश- महात-तत्व में प्रवेश करते हैं। समय के बल से महात-तत्व फिर से अव्यक्त कुल भौतिक ऊर्जा में प्रवेश करता है, कुल भौतिक ऊर्जा ऊर्जावान प्रधान में प्रवेश करती है और प्रधान आपके अंदर प्रवेश करता है। इसलिए संपूर्ण ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के विनाश के बाद, आप अकेले ही अपने पारलौकिक नाम, रूप, गुण और साधनों के साथ बचे रहते हैं।
"भगवान, मैं आपको नमस्कार करती हूँ क्योंकि आप अव्यक्त कुल ऊर्जा के निर्देशक हैं और भौतिक प्रकृति के अंतिम भंडार हैं। मेरे भगवान, संपूर्ण ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति समय के प्रभाव में है, जो क्षण से लेकर वर्ष की अवधि तक है। सभी आपके निर्देशन में कार्य करते हैं। आप हर चीज़ के मूल निर्देशक हैं और सभी शक्तिशाली ऊर्जाओं के भंडार हैं।"
