श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 3: कृष्ण जन्म  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  10.3.25 
नष्टे लोके द्विपरार्धावसाने
महाभूतेष्वादिभूतं गतेषु ।
व्यक्तेऽव्यक्तं कालवेगेन याते
भवानेक: शिष्यतेऽशेषसंज्ञ: ॥ २५ ॥
 
 
अनुवाद
लाखों साल बाद, ब्रह्मांड के विनाश के समय, जब हर कुछ, व्यक्त और अव्यक्त, समय के बल से नष्ट हो जाता है, तो पाँच स्थूल तत्व सूक्ष्म रूप में आ जाते हैं और व्यक्तियाँ अव्यक्त हो जाती हैं। उस समय सिर्फ़ आप रहते हैं, और आपको अनंत शेष-नाग कहा जाता है।
 
After millions of years, at the time of world-destruction, when all the manifest and unmanifest things are destroyed by the force of time, then the five gross elements assume subtle forms and the manifest things become unmanifest. At that time, only you remain and you are known as Ananta Shesh-Naag.
तात्पर्य
संहार के समय, पाँच स्थूल तत्त्व- पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश- मन, बुद्धि तथा अहंकार में प्रवेश कर जाते हैं और समस्त ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति भगवान की आध्यात्मिक ऊर्जा में प्रवेश कर जाती है, जो सबके मूल रूप में अकेले शेष रहते हैं। इसलिए भगवान को शेष-नाग, आदिपुरुष और कई अन्य नामों से जाना जाता है।

इसलिए देवकी ने प्रार्थना की, "कई लाखों वर्षों के बाद, जब भगवान ब्रह्मा अपने जीवन के अंत में पहुँचते हैं, तो ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति का विनाश हो जाता है। उस समय पाँच तत्व पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु और आकाश- महात-तत्व में प्रवेश करते हैं। समय के बल से महात-तत्व फिर से अव्यक्त कुल भौतिक ऊर्जा में प्रवेश करता है, कुल भौतिक ऊर्जा ऊर्जावान प्रधान में प्रवेश करती है और प्रधान आपके अंदर प्रवेश करता है। इसलिए संपूर्ण ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति के विनाश के बाद, आप अकेले ही अपने पारलौकिक नाम, रूप, गुण और साधनों के साथ बचे रहते हैं।

"भगवान, मैं आपको नमस्कार करती हूँ क्योंकि आप अव्यक्त कुल ऊर्जा के निर्देशक हैं और भौतिक प्रकृति के अंतिम भंडार हैं। मेरे भगवान, संपूर्ण ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति समय के प्रभाव में है, जो क्षण से लेकर वर्ष की अवधि तक है। सभी आपके निर्देशन में कार्य करते हैं। आप हर चीज़ के मूल निर्देशक हैं और सभी शक्तिशाली ऊर्जाओं के भंडार हैं।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)