श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 3: कृष्ण जन्म  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  10.3.22 
अयं त्वसभ्यस्तव जन्म नौ गृहे
श्रुत्वाग्रजांस्ते न्यवधीत् सुरेश्वर ।
स तेऽवतारं पुरुषै: समर्पितं
श्रुत्वाधुनैवाभिसरत्युदायुध: ॥ २२ ॥
 
 
अनुवाद
हे मेरे प्रभु, देवताओं के स्वामी, यह भविष्यवाणी सुनकर कि आप हमारे घर में जन्म लेंगे और उसका वध करेंगे, इस असभ्य कंस ने आपके कई बड़े भाइयों को मार डाला है। जैसे ही वह अपने सेनापतियों से यह सुनेगा कि आप प्रकट हुए हैं, वह तुरंत ही आपको मारने के लिए हथियार लेकर आ धमकेगा।
 
O Supreme Lord, O Lord of the gods, having heard the prophecy that You would be born in our house and kill him, this uncivilized Kamsa has killed many of Your forefathers. As soon as he hears from his generals that You have appeared, he will immediately rush forth with weapons to kill You.
तात्पर्य
कंस को यहाँ असभ्य के रूप में वर्णित किया गया है, जिसका अर्थ है "असभ्य" या "सबसे घृणित," क्योंकि उसने अपनी बहन के कई बच्चों को मार डाला। जब उसने भविष्यवाणी सुनी कि वह उसके आठवें पुत्र द्वारा मारा जाएगा, तो यह असभ्य आदमी, कंस, अपनी निर्दोष बहन को उसके विवाह के अवसर पर मारने के लिए तुरंत तैयार हो गया। एक असभ्य व्यक्ति अपनी इंद्रियों की संतुष्टि के लिए कुछ भी कर सकता है। वह बच्चों को मार सकता है, वह गायों को मार सकता है, वह ब्राह्मणों को मार सकता है, वह बूढ़े लोगों को मार सकता है; उसे किसी पर दया नहीं है। वैदिक सभ्यता के अनुसार, यदि गाय, महिलाएं, बच्चे, बूढ़े और ब्राह्मण दोषी हैं तो उन्हें छोड़ दिया जाना चाहिए। लेकिन असुर, असभ्य लोग, इसकी परवाह नहीं करते हैं। वर्तमान समय में, गायों और बच्चों की हत्या पर अबाध रूप से चल रहा है, और इसलिए यह सभ्यता बिल्कुल भी मानवीय नहीं है, और जो लोग इस निंदित सभ्यता का संचालन कर रहे हैं वे असभ्य असुर हैं।

ऐसे असभ्य लोग कृष्ण चेतना आन्दोलन के पक्ष में नहीं हैं। लोक सेवकों के रूप में, वे बिना किसी हिचकिचाहट के यह घोषित करते हैं कि हरे कृष्ण आंदोलन का जाप एक उपद्रव है, हालाँकि भगवद्गीता स्पष्ट रूप से कहती है, सततं कीर्तयंतो माम यतंतश्च दृढ़व्रताः। इस श्लोक के अनुसार, महात्माओं का कर्तव्य है कि वे हरे कृष्ण मंत्र का जप करें और अपनी क्षमता के अनुसार इसे पूरी दुनिया में फैलाने का प्रयास करें। दुर्भाग्य से, समाज ऐसी असभ्य अवस्था में है कि तथाकथित महात्मा हैं जो गायों और बच्चों को मारने और हरे कृष्ण आंदोलन को रोकने के लिए तैयार हैं। इस तरह की असभ्य गतिविधियों को वास्तव में हरे कृष्ण आंदोलन के बॉम्बे केंद्र, हरे कृष्ण भूमि के विरोध में प्रदर्शित किया गया था। जैसा कि कंस से देवकी और वसुदेव के सुंदर बच्चे को मारने की उम्मीद नहीं की जाती थी, असभ्य समाज, हालांकि कृष्ण चेतना आंदोलन की उन्नति के बारे में नाखुश था, लेकिन उससे इसे रोकने की उम्मीद नहीं की जा सकती। फिर भी हमें कई तरह से कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। हालाँकि कृष्ण को मारा नहीं जा सकता है, वसुदेव, कृष्ण के पिता के रूप में, कांप रहे थे क्योंकि स्नेह में उन्हें लगा कि कंस तुरंत आकर उनके बेटे को मार डालेगा। इसी तरह, यद्यपि कृष्ण चेतना आन्दोलन और कृष्ण अलग नहीं हैं और कोई भी असुर इसकी जाँच नहीं कर सकता है, हमें डर है कि किसी भी क्षण असुर दुनिया के किसी भी हिस्से में इस आंदोलन को रोक सकते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)