सारी गोपियों के बीच में, अच्युत भगवान कृष्ण ऐसे दिखाई दे रहे थे जैसे कि तारों से घिरा हुआ चंद्रमा दिखाई देता है। इतने उदार कार्यों वाले कृष्ण ने अपनी स्नेहमयी निगाहों से उनके चेहरों को खिला दिया था और उनकी खिली हुई मुस्कान से चमेली की कली जैसे दाँतों की चमक दिखाई दे रही थी।
In the midst of the assembled gopis, the infallible Lord Krishna appeared like the moon surrounded by stars. Krishna, who was so generous in his actions, made their faces blossom with His loving glances and His bright smile revealed the brilliance of His teeth, which were like jasmine buds.
तात्पर्य
अच्युत शब्द से सूचित किया है कि रात की सभा में भगवान श्री कृष्ण किसी भी गोपी को सखी को प्रसन्न करने में विफल नहीं हुए ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥