Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.29.42: श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: अपने निराशाजनक शब्दों को सुनकर गोपियों पर मुस्कुराते हुए, सभी योगेश्वरों के भी ईश्वर श्री कृष्ण ने उन सबके साथ कृपा करके आनंदपूर्वक समय बिताया, हालाँकि वो अपने आप में ही आत्मसंतुष्ट हैं। | bhagavat अध्याय 10.29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा: अपने निराशाजनक शब्दों को सुनकर गोपियों पर मुस्कुराते हुए, सभी योगेश्वरों के भी ईश्वर श्री कृष्ण ने उन सबके साथ कृपा करके आनंदपूर्वक समय बिताया, हालाँकि वो अपने आप में ही आत्मसंतुष्ट हैं।
Sukadeva Goswami said: Smiling at the distressed words of the gopis, Lord Krishna, the Lord of all yoga-lords, also graciously rejoiced with all of them, although they were self-satisfied.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥