Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.29.41: स्पष्ट झलकता है कि व्रजवासियों के भय एवं कष्ट को हरने हेतु आपने इस भूमि पर वैसे ही अवतार लिया है जैसे कि आदि भगवान् देव-लोक की रक्षा करते हैं। तो, हे दुखियारों के मित्र, अपनी करूणा भरी एवं शीतलता प्रदान करने वाली कमल सी हाथों को अपनी दासियों के सिरों पर तथा तप्त स्तनों पर रखिये।   |   bhagavat अध्याय 10.29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  10.29.41 
व्यक्तं भवान् व्रजभयार्तिहरोऽभिजातो
देवो यथादिपुरुष: सुरलोकगोप्ता ।
तन्नो निधेहि करपङ्कजमार्तबन्धो
तप्तस्तनेषु च शिर:सु च किङ्करीणाम् ॥ ४१ ॥
 
 
अनुवाद
स्पष्ट झलकता है कि व्रजवासियों के भय एवं कष्ट को हरने हेतु आपने इस भूमि पर वैसे ही अवतार लिया है जैसे कि आदि भगवान् देव-लोक की रक्षा करते हैं। तो, हे दुखियारों के मित्र, अपनी करूणा भरी एवं शीतलता प्रदान करने वाली कमल सी हाथों को अपनी दासियों के सिरों पर तथा तप्त स्तनों पर रखिये।
 
It is clear that you have taken birth in this world to remove the fear and suffering of the residents of Vraja in the same manner as the original Lord protects the heavenly world. Therefore, O friend of the suffering, place your lotus hand on the heads and hot breasts of your maids.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)