"जब कृष्ण ने अपनी बाँसुरी बजाई तो उन्होंने वृंदावन में चोरी का एक भयानक कृत्य किया। उनकी बाँसुरी का गीत गोपियों के कानों से होकर उनके हृदय के भीतरी खजाने में प्रवेश कर गया। उस अद्भुत संगीत ने उनकी सभी सबसे मूल्यवान संपत्ति - उनकी विनम्रता, शर्म, भय और विवेक, साथ ही उनके दिमाग को चुरा लिया - और एक पल में इस संगीत ने इन सभी चीजों को कृष्ण को सौंप दिया। अब हर गोपी भगवान से अपनी निजी संपत्ति वापस करने के लिए विनती करने गई। हर सुंदर युवती सोच रही थी, 'मुझे उस महान चोर को पकड़ना है,' और इस तरह वे आगे बढ़ीं, प्रत्येक दूसरे के लिए अज्ञात।"
