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bhagavat 10.29.36: हे कमलनयन, जब लक्ष्मीजी आपके चरणकमलों का स्पर्श करती हैं, तो वह उनके लिए उल्लास का पल होता है। आप वनवासी लोगों को अति प्रिय हैं, इसलिए हम भी आपके चरणकमलों का स्पर्श करेंगी। उसके बाद हम किसी और व्यक्ति के सामने खड़ी भी नहीं होंगी क्योंकि आपने हमें पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया होगा।   |   bhagavat अध्याय 10.29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  10.29.36 
यर्ह्यम्बुजाक्ष तव पादतलं रमाया
दत्तक्षणं क्‍वचिदरण्यजनप्रियस्य ।
अस्प्राक्ष्म तत्प्रभृति नान्यसमक्षमञ्ज:
स्थातुं स्त्वयाभिरमिता बत पारयाम: ॥ ३६ ॥
 
 
अनुवाद
हे कमलनयन, जब लक्ष्मीजी आपके चरणकमलों का स्पर्श करती हैं, तो वह उनके लिए उल्लास का पल होता है। आप वनवासी लोगों को अति प्रिय हैं, इसलिए हम भी आपके चरणकमलों का स्पर्श करेंगी। उसके बाद हम किसी और व्यक्ति के सामने खड़ी भी नहीं होंगी क्योंकि आपने हमें पूरी तरह से संतुष्ट कर दिया होगा।
 
O lotus-eyed one, whenever Goddess Lakshmi touches the soles of your feet, she considers it an occasion for joy. You are very dear to the forest dwellers, so we will also touch those feet of yours. After that we will not even stand before anyone because then we will be completely satisfied by you.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)