Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.29.31: सुंदर गोपियों ने कहा - हे सर्वशक्तिमान! आप इस तरह से निर्दयी होकर नहीं बोल सकते। जो भौतिक सुख को त्यागकर सिर्फ और सिर्फ आपके चरणों की भक्ति करना चाहती हैं, उन्हें ना ठुकराइये। हे जिद्दी! हमारे साथ वैसा ही प्रेम भाव रखें, जिस तरह से श्री नारायण अपने भक्तों से रखते हैं, जो कि मोक्ष/मुक्ति के लिए प्रयत्न करते हैं। | bhagavat अध्याय 10.29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सुंदर गोपियों ने कहा - हे सर्वशक्तिमान! आप इस तरह से निर्दयी होकर नहीं बोल सकते। जो भौतिक सुख को त्यागकर सिर्फ और सिर्फ आपके चरणों की भक्ति करना चाहती हैं, उन्हें ना ठुकराइये। हे जिद्दी! हमारे साथ वैसा ही प्रेम भाव रखें, जिस तरह से श्री नारायण अपने भक्तों से रखते हैं, जो कि मोक्ष/मुक्ति के लिए प्रयत्न करते हैं।
The beautiful gopikas said: O Almighty, you should not speak so cruelly. Do not spurn us. We have given up all material pleasures to worship your feet. O obstinate one, please love us the way Sri Narayana loves his devotees who strive for liberation.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥