दृष्ट्वा कुमुद्वन्तमखण्डमण्डलंरमाननाभं नवकुङ्कुमारुणम् ।
वनं च तत्कोमलगोभी रञ्जितंजगौ कलं वामदृशां मनोहरम् ॥ ३ ॥
अनुवाद
भगवान श्री कृष्ण ने पूर्णिमा के दिन के चाँद के लालिमा लिए हुए रूप को देखा, मानो नववधू के सिंदूरी चेहरे की तरह। चाँद को सामने देखकर खिले हुए कुमुद के फूलों और उसकी कम रोशनी से धीरे से जगमगाते हुए जंगल को भी देखा। इस प्रकार भगवान ने अपनी बांसुरी से ऐसी सुरीली धुन छेड़ी, जिसमें सुंदर आंखों वाली गोपियों का मन आकर्षित हो गया।
Lord Krishna looked at the unbroken circle of the full moon shining with the red glow of the newly smeared vermilion. It looked like the face of Goddess Lakshmi. He also looked at the lilies blooming in the presence of the moon and the forest dimly lit by its rays. In this way, the Lord played a sweet tune on his flute that attracted the minds of the beautiful-eyed gopis.
तात्पर्य
इस पद्य में जगाउ शब्द बताता है कि भगवान कृष्ण ने अपनी बांसुरी पर गीत बजाया, जैसा कि पद 40 में का स्त्री अंगा ते कला-पदायत-वेणु-गीता शब्दों द्वारा पुष्टि की गई है। रमा शब्द न केवल भगवान विष्णु की पत्नी का संकेत हो सकता है बल्कि श्रीमती राधारानी का भी, जो कि भाग्य की मूल देवी हैं। भगवान कृष्ण चंद्रमा के वंश में प्रकट हुए, और राधा के साथ रासलीला के प्रवेश की तैयारी में चंद्रमा यहां एक प्रमुख भूमिका निभाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥