Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.29.26: सभ्य परिवार की स्त्री के लिए, मामूली व्यभिचारी संबंध हमेशा निंदनीय होते हैं। ये उसके स्वर्ग जाने में बाधा डालते हैं, उसकी प्रतिष्ठा को नष्ट करते हैं और उसके लिए कठिनाई और भय उत्पन्न करते हैं। | bhagavat अध्याय 10.29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अस्वर्ग्यमयशस्यं च फल्गु कृच्छ्रं भयावहम् ।
जुगुप्सितं च सर्वत्र ह्यौपपत्यं कुलस्त्रिय: ॥ २६ ॥
अनुवाद
सभ्य परिवार की स्त्री के लिए, मामूली व्यभिचारी संबंध हमेशा निंदनीय होते हैं। ये उसके स्वर्ग जाने में बाधा डालते हैं, उसकी प्रतिष्ठा को नष्ट करते हैं और उसके लिए कठिनाई और भय उत्पन्न करते हैं।
For a woman of noble birth, petty adulteries are always condemnable; they hinder her from going to heaven, ruin her reputation, and cause her difficulties and fear.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥