Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.29.23: दूसरी तरफ, शायद तुम लोग अपने प्रति मेरे अगाध प्रेम के कारण यहाँ आई हो क्योंकि इस प्रेम ने तुम्हारे हृदयों को अपने कब्ज़े में कर लिया है। यह सचमुच ही सराहनीय है क्योंकि सभी जीव प्राकृतिक रूप से मुझसे स्नेह करते हैं। | bhagavat अध्याय 10.29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अथ वा मदभिस्नेहाद् भवत्यो यन्त्रिताशया: ।
आगता ह्युपपन्नं व: प्रीयन्ते मयि जन्तव: ॥ २३ ॥
अनुवाद
दूसरी तरफ, शायद तुम लोग अपने प्रति मेरे अगाध प्रेम के कारण यहाँ आई हो क्योंकि इस प्रेम ने तुम्हारे हृदयों को अपने कब्ज़े में कर लिया है। यह सचमुच ही सराहनीय है क्योंकि सभी जीव प्राकृतिक रूप से मुझसे स्नेह करते हैं।
Or perhaps you have come here because of your immense love for me because this love has won over your hearts. This is indeed commendable because all beings love me naturally.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥