तदोडुराज: ककुभ: करैर्मुखंप्राच्या विलिम्पन्नरुणेन शन्तमै: ।
स चर्षणीनामुदगाच्छुचो मृजन्प्रिय: प्रियाया इव दीर्घदर्शन: ॥ २ ॥
अनुवाद
तब चाँद ने अपने सुखदायक लाल रंग की किरणों से पूरबी क्षितिज को पवित्र करते हुए उदय लिया, और इस तरह से वह उदय होते हुए देखने वालों की पीड़ा को दूर कर गया। वह चाँद मानो एक प्यारे पति के समान था, जो लंबे समय तक विदेश रहने के बाद घर लौटकर अपनी मुँह देखी पत्नी के सिर में लाल सिंदूर भर देता है।
Then the moon rose, colouring the western horizon with its soothing red rays and thus alleviating the suffering of those who witnessed its rise. This moon was like a beloved husband who returns home after a long absence and adorns the face of his beloved wife with red vermilion.
तात्पर्य
युवा कृष्ण ने अपनी आंतरिक शक्ति को जोड़ा, और उसने तुरंत वैवाहिक प्रेम के लिए एक रोमांचक वातावरण बनाया।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥