श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 29: रासनृत्य के लिए कृष्ण तथा गोपियों का मिलन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  10.29.18 
श्रीभगवानुवाच
स्वागतं वो महाभागा: प्रियं किं करवाणि व: ।
व्रजस्यानामयं कच्चिद् ब्रूतागमनकारणम् ॥ १८ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान कृष्ण ने कहा : हे परम सौभाग्यशाली महिलाओं, आप सबका स्वागत है। आप लोगों की प्रसन्नता के लिए मैं क्या कर सकता हूँ? व्रज में सब कुछ अच्छा और मंगलमय तो है? आप यहाँ आने का कारण मुझे बताएँ।
 
Lord Krishna said: O very fortunate women, you are welcome. What can I do to make you happy? Is everything well in Vraj? Tell me the reason for your coming here.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण पूरी तरह से जानते थे कि गोपियाँ क्यों आई थीं। वास्तव में, उन्होंने उन्हें अपनी बाँसुरी की मधुर धुनों से बुलाया था। इसलिए कृष्ण बस गोपियों को चिढ़ा रहे थे और उनसे पूछ रहे थे कि "तुम इतनी जल्दी यहाँ क्यों आई हो? क्या शहर में कुछ गड़बड़ी है? तुम यहाँ क्यों आई हो, वैसे भी? तुम्हें क्या चाहिए?"

गोपियाँ, कृष्ण की नवयौवना प्रेमिकाएँ थीं, इसलिए इन सवालों ने निश्चित रूप से उन्हें हैरान कर दिया, क्योंकि उन्होंने कृष्ण के आह्वान का जवाब, उनके साथ दाम्पत्य प्रेम का आनंद लेने की सरल मानसिकता से दिया था।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)