नमस्तुभ्यं भगवते ब्रह्मणे परमात्मने ।
न यत्र श्रूयते माया लोकसृष्टिविकल्पना ॥ ६ ॥
अनुवाद
हे परमपुरुषोत्तम, आप परम सत्य और परमात्मा हैं। मैं आपको नमस्कार करता हूँ। आपके भीतर माया-शक्ति का लेशमात्र भी नहीं है, जो इस संसार का निर्माण और संचालन करती है।
I bow to You, O Supreme Personality of Godhead, the Supreme Truth, the Supreme Soul; You do not have even the slightest trace of the illusory power which creates this universe according to Yourself.
तात्पर्य
इस संदर्भ में 'श्रृयते' शब्द महत्वपूर्ण है। श्रुति या वैदिक साहित्य में स्वयं प्रभु द्वारा या उनके प्रबुद्ध प्रतिनिधियों द्वारा दिए गए अधिकृत वक्तव्य होते हैं। इस प्रकार न तो प्रभु और न ही मान्यता प्राप्त आध्यात्मिक अधिकारी कभी यह कहेंगे कि परम सत्य भगवान के व्यक्तित्व में भ्रम की त्रुटि होती है। श्रील श्रीधर स्वामी बताते हैं कि यहाँ पर 'ब्रह्मणे' शब्द सूचित करता है कि प्रभु स्वयं में पूर्ण हैं, और 'परमात्मने' शब्द इंगित करता है कि वे सभी जीवित संस्थाओं के नियंत्रक हैं।
इस प्रकार, सर्वोच्च पुरुष के भीतर, जो स्वयं में पूर्ण और सर्वशक्तिमान हैं, हमें भौतिक, भ्रामक ऊर्जा का कोई अधिकार क्षेत्र नहीं मिलता।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥