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bhagavat 10.28.12: सर्वज्ञ होने के कारण, भगवान श्री कृष्ण पहले से ही जानते थे कि चरवाहे क्या सोच रहे हैं। उनकी इच्छाओं को पूरा करके उन पर अपनी कृपा दिखाने के लिए, भगवान ने इस प्रकार सोचा।   |   bhagavat अध्याय 10.28: कृष्ण द्वारा वरुणलोक से नन्द महाराज की रक्षा   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 28: कृष्ण द्वारा वरुणलोक से नन्द महाराज की रक्षा  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.28.12 
इति स्वानां स भगवान् विज्ञायाखिलद‍ृक्स्वयम् ।
सङ्कल्पसिद्धये तेषां कृपयैतदचिन्तयत् ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
सर्वज्ञ होने के कारण, भगवान श्री कृष्ण पहले से ही जानते थे कि चरवाहे क्या सोच रहे हैं। उनकी इच्छाओं को पूरा करके उन पर अपनी कृपा दिखाने के लिए, भगवान ने इस प्रकार सोचा।
 
Being omniscient, Lord Krishna automatically understood what the cowherds desired. To show mercy on them by fulfilling their desires, the Lord thought in this way.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)