ते चौत्सुक्यधियो राजन् मत्वा गोपास्तमीश्वरम् ।
अपि न: स्वगतिं सूक्ष्मामुपाधास्यदधीश्वर: ॥ ११ ॥
अनुवाद
[वरुण के साथ कृष्ण की लीला सुनकर] ग्वालों ने सोचा कि कृष्ण ही ज़रूर परमेश्वर हो सकते हैं। हे राजा, उनकी बुद्धि उत्सुकता से भर गई। उन्होंने सोचा, "क्या परमेश्वर हमें भी अपना दिव्य धाम प्रदान करेंगे?"
[Hearing Krishna's lila with Varuna] the cowherds thought that Krishna was certainly the Lord. O King, their minds were filled with curiosity. They thought, "Will the Lord grant His divine abode to all of us also?"
तात्पर्य
कृष्ण द्वारा वरुण के निवास में अपने पिता को छुड़ाने जाने की बात सुनकर ग्वाले प्रसन्नता से भर गए। उन्हें अचानक यह बोध हुआ कि वे दरअसल भगवान के साथ व्यवहार कर रहे हैं। वे मौजूदा जीवन के बाद अपने मंगलमय गंतव्य के बारे में आपस में अनुमान लगाने लगे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)