Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
bhagavat 10.27.3: अब तक इन्द्र सर्वशक्तिमान कृष्ण की अलौकिक शक्ति को अनुभव और देख चुका था तथा इस प्रकार तीनों लोकों का स्वामी होने का उसका मिथ्या अभिमान चूर हो चुका था। प्रार्थना हेतु दोनों हाथ जोड़कर उसने प्रभु को इस प्रकार सम्बोधित किया।   |   bhagavat अध्याय 10.27: इन्द्रदेव तथा माता सुरभि द्वारा स्तुति   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 27: इन्द्रदेव तथा माता सुरभि द्वारा स्तुति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.27.3 
द‍ृष्टश्रुतानुभावोऽस्य कृष्णस्यामिततेजस: ।
नष्टत्रिलोकेशमद इदमाह कृताञ्जलि: ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
अब तक इन्द्र सर्वशक्तिमान कृष्ण की अलौकिक शक्ति को अनुभव और देख चुका था तथा इस प्रकार तीनों लोकों का स्वामी होने का उसका मिथ्या अभिमान चूर हो चुका था। प्रार्थना हेतु दोनों हाथ जोड़कर उसने प्रभु को इस प्रकार सम्बोधित किया।
 
By now Indra had heard and seen the divine power of the Almighty Krishna and thus his false pride of being the Lord of the three worlds was shattered. With folded hands he addressed the Lord as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)