दृष्टश्रुतानुभावोऽस्य कृष्णस्यामिततेजस: ।
नष्टत्रिलोकेशमद इदमाह कृताञ्जलि: ॥ ३ ॥
अनुवाद
अब तक इन्द्र सर्वशक्तिमान कृष्ण की अलौकिक शक्ति को अनुभव और देख चुका था तथा इस प्रकार तीनों लोकों का स्वामी होने का उसका मिथ्या अभिमान चूर हो चुका था। प्रार्थना हेतु दोनों हाथ जोड़कर उसने प्रभु को इस प्रकार सम्बोधित किया।
अब तक इन्द्र सर्वशक्तिमान कृष्ण की अलौकिक शक्ति को अनुभव और देख चुका था तथा इस प्रकार तीनों लोकों का स्वामी होने का उसका मिथ्या अभिमान चूर हो चुका था। प्रार्थना हेतु दोनों हाथ जोड़कर उसने प्रभु को इस प्रकार सम्बोधित किया।