इस अध्याय के श्लोक 11 में इंद्र ने जोर देकर कहा कि भगवान कृष्ण ही असल में सब कुछ हैं और इस प्रकार इंद्र के अपने ही मापदंड अनुसार, भगवान कृष्ण को भूलना स्पष्ट रूप से एक पागलपन की स्थिति है। जब परम भगवान हमें अपने परम अस्तित्व की याद दिलाते हैं, तो वह किसी सांसारिक राजनीतिज्ञ या मनोरंजनकर्ता की तरह खुद का गर्व से विज्ञापन नहीं कर रहे होते हैं। भगवान अपने अनंत अस्तित्व में स्व-संतुष्ट हैं और अपने शाश्वत सहयोगियों के रूप में हमें अपने स्वयं के पूर्ण अस्तित्व में वापस लाने का प्यार से प्रयास करते हैं।
ईश्वर के दृष्टिकोण से स्वर्ग के शक्तिशाली राजा इंद्र भी एक मात्र बच्चे हैं - और उस पर भी एक शरारती बच्चे - और इस प्रकार भगवान, एक देखभाल करनेवाले पिता होने के कारण, अपने बच्चे को दंडित करते हैं और उसे कृष्ण चेतना की समझदारी में वापस ले आते हैं।
