श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 26: अद्भुत कृष्ण  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  10.26.6 
एकहायन आसीनो ह्रियमाणो विहायसा ।
दैत्येन यस्तृणावर्तमहन् कण्ठग्रहातुरम् ॥ ६ ॥
 
 
अनुवाद
एक वर्ष की उम्र में, जब वह चुपचाप बैठा था, तभी तृणावर्त नाम के एक राक्षस ने उसे आकाश में उठा लिया। परन्तु बालक कृष्ण ने उस राक्षस की गर्दन पकड़ ली, जिससे उसे बहुत पीड़ा हुई और इस प्रकार उसे मार डाला।
 
At the age of one year, when He was sitting quietly, an Asura named Trinavarta carried Him away into the sky. But the child Krishna grabbed the Asura by the neck causing him great pain and thus killed him.
तात्पर्य
ग्वाले जो कृष्ण को साधारण बच्चे के समान प्रेम करते थे, इन सभी क्रियाओं से उनके आश्चर्य का कोई ठिकाना नहीं रहा। एक नवजात शिशु साधारणत: एक शक्तिशाली डाइन को नहीं मार सकता है, और कोई कठिनाई से ही सोच सकता है कि एक एक-वर्षीय शिशु ऐसे राक्षस को मार सकता है जो उसका अपहरण करके उसे आकाश में उठा ले गया है। पर कृष्ण ने ये सारे अद्भुत कार्य किए और ग्वाले लोग उनकी क्रियाओं को याद करके और उन पर चर्चा करके उनके प्रति अपने प्रेम को बढ़ा रहे थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)