बालकस्य यदेतानि कर्माण्यत्यद्भुतानि वै ।
कथमर्हत्यसौ जन्म ग्राम्येष्वात्मजुगुप्सितम् ॥ २ ॥
अनुवाद
[ग्वालों ने कहा]: जब यह बालक ऐसे अद्भुत कार्य करता है, तो फिर उसके लिए हम जैसे सामान्य लोगों के बीच जन्म लेना किस तरह उचित हो सकता है? ऐसा जन्म तो उसके लिए अपमानजनक होगा।
[The cowherds said]: When this child performs such wonderful deeds, how then did he manage to be born among worldly persons like us? Such a birth would seem abhorrent to him.
तात्पर्य
सामान्य जीव तो असुविधा नही टाल सकता पर सर्वेश्वर तो सदैव अपने सुख के लिए उत्तम इंतजार कर ही सकते हैं ।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥