श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 26: अद्भुत कृष्ण  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.26.16 
वर्णास्त्रय: किलास्यासन् गृह्णतोऽनुयुगं तनू: ।
शुक्लो रक्तस्तथा पीत इदानीं कृष्णतां गत: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
[गर्ग मुनि ने कहा था]: तुम्हारा पुत्र कृष्ण हर युग में अवतार के रूप में प्रकट होता है। अतीत में उसने तीन रंग – सफेद, लाल और पीला – धारण किए थे और अब वह काले रंग में प्रकट हुआ है।
 
[Garga Muni said]: Your son Krishna appears as an incarnation in every age. In the past he wore three colours - white, red and yellow and now he has appeared in black colour.
तात्पर्य
यह और अगले छः श्लोक (17 से 22 तक) इस कांड के आठवे अध्याय से लिए गए हैं, जिसमें गर्ग मुनि नंद महाराज को नंद के पुत्र कृष्ण के बारे में बताते हैं। इन श्लोकों का अनुवाद यहाँ पर उनकी दिव्य कृपा ए.सी. भक्तिवेदांत स्वामी प्रभुपाद के अनुवाद पर आधारित है। आठवें अध्याय में, जहां मूल श्लोक प्रकट होते हैं, पाठक को श्रील प्रभुपाद द्वारा व्यापक टीका-टिप्पणी मिलेगी।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)