श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 26: अद्भुत कृष्ण  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  10.26.12 
आशीविषतमाहीन्द्रं दमित्वा विमदं ह्रदात् ।
प्रसह्योद्वास्य यमुनां चक्रेऽसौ निर्विषोदकाम् ॥ १२ ॥
 
 
अनुवाद
भगवान् कृष्ण ने सर्वाधिक विषैले नाग कालिय को दंडित किया और उसे वश में करके उसे यमुना के सरोवर से बल पूर्वक बाहर निकाल दिया। इस प्रकार भगवान ने उस नदी के जल को सांप के प्रचंड विष से मुक्त कराया।
 
Krishna punished the extremely poisonous serpent Kaliya and made him docile and forcibly drove him out of the Yamuna lake. In this way, the Lord made the water of that river free from the snake's deadly poison.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)