श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 26: अद्भुत कृष्ण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.26.11 
प्रलम्बं घातयित्वोग्रं बलेन बलशालिना ।
अमोचयद् व्रजपशून्गोपांश्चारण्यवह्नित: ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
बलशाली भगवान बलराम के हाथों भयंकर दैत्य प्रलंबासुर का अंत कराकर कृष्ण ने व्रज के ग्वालबालों और उनके पशुओं को जंगल की आग से रक्षा की।
 
By having the fierce demon Pralambasura killed by the mighty Lord Balarama, Krishna saved the cowherd boys of Vraja and their cattle from forest fire.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)