श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 25: कृष्ण द्वारा गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  10.25.9 
विद्योतमाना विद्युद्भ‍ि: स्तनन्त: स्तनयित्नुभि: ।
तीव्रैर्मरुद्गणैर्नुन्ना ववृषुर्जलशर्करा: ॥ ९ ॥
 
 
अनुवाद
वायुदेवों के भयावह वेग से प्रेरित होकर, बादल बिजली की कौंध से चमक उठे और ओलों की वर्षा करते हुए कड़कड़ाती आवाज़ में गरजने लगे।
 
The clouds, driven by the terrible wind-gods, blazed up with lightning and roared with thunder, raining down hail.
तात्पर्य
श्रील श्रीधर स्वामी बताते हैं कि मरुद्-गणैः शब्द सात महान पवनों को इंगित करता है, जैसे कि आवाहा, जो भुवर्लोक क्षेत्र की अध्यक्षता करते हैं, और प्रवाह, जो ग्रहों को अपने स्थानों पर रखते हैं।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)