इन्द्र कृष्ण को वाचालम कहकर फटकारना चाहता था क्योंकि प्रभु ने कर्म-मीमांसा और सांख्य दर्शन की पंक्ति में कई दुस्साहसी तर्क प्रस्तुत किये थे, यद्यपि उन्होंने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया था; इस प्रकार इंद्र ने प्रभु को बालिश, "मूर्ख" कहा। इन्द्र ने उन्हें स्तब्ध कहा क्योंकि उन्होंने अपने पिता की उपस्थिति में भी साहसपूर्वक बात की थी। इस प्रकार यद्यपि इंद्र ने श्री कृष्ण की आलोचना करने का प्रयास किया, भगवान का दिव्य चरित्र वास्तव में निर्दोष है, और यह अध्याय प्रदर्शित करेगा कि कैसे इंद्र भगवान की स्थिति को पहचानने के लिए आया।
