श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 25: कृष्ण द्वारा गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  10.25.29 
तं प्रेमवेगान्निर्भृता व्रजौकसोयथा समीयु: परिरम्भणादिभि: ।
गोप्यश्च सस्‍नेहमपूजयन् मुदादध्यक्षताद्भ‍िर्युयुजु: सदाशिष: ॥ २९ ॥
 
 
अनुवाद
वृन्दावन के सारे निवासी प्रेम से अभिभूत थे। उन्होंने आगे बढक़र अपने अपने रिश्ते के अनुसार श्रीकृष्ण को बधाई दी—किसी ने उनको गले लगाया, तो कोई उनके समक्ष नतमस्तक हुआ इत्यादि-इत्यादि। गोपियों ने सम्मान के प्रतीकस्वरूप उन्हें दही तथा अक्षत, जौ मिलाया हुआ जल अर्पित किया। उन्होंने कृष्ण पर आशीर्वादों की झड़ी लगा दी।
 
All the residents of Vrindavan were overwhelmed with love. They came forward and greeted Shri Krishna according to their relationship - some hugged him, some bowed before him and so on. The Gopis offered him curd and water mixed with rice and barley as a symbol of respect. They showered blessings on Krishna.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर बताते हैं कि वृंदावन के प्रत्येक निवासियों ने कृष्ण को अपने तरीके से माना - समुदाय के एक हीन, छोटे सदस्य के रूप में; एक समान के रूप में; या एक श्रेष्ठ के रूप में - और उन्होंने उसके अनुसार उससे व्यवहार किया। कृष्ण के श्रेष्ठियों ने शुभ आशीर्वाद दिए, प्यार से उनके सिर को सूँघा, उन्हें चूमा, उनकी बाँहों और अंगुलियों को रगड़ा, और माता-पिता के स्नेह से पूछा कि क्या वे थके हुए हैं या दर्द में हैं। कृष्ण के बराबर वाले हँसे या उनके साथ मजाक किया, और जो छोटे थे, वे उनके चरणों पर गिर पड़े, उनके पैरों की मालिश की और इसी तरह। इस श्लोक में शब्द ca इंगित करता है कि ब्राह्मणों की पत्नियां दही और अखंड अनाज जैसी शुभ वस्तुओं की पेशकश करने के लिए गोपियों में शामिल हुईं। भगवान कृष्ण को इस तरह का आशीर्वाद मिला: "आप दुष्टों को वश में करें, सभ्य लोगों की रक्षा करें, अपने माता-पिता को खुशी दें और सभी धन और वैभव से समृद्ध हों।"
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)