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bhagavat 10.25.24: जब इन्द्र ने कृष्ण की योगशक्ति के इस चमत्कार को देखा तो वह आश्चर्यचकित हो उठा। अपने अहंकार के चकनाचूर हो जाने तथा अपने इरादों के टूट जाने से उसने अपने मेघों को रुकने का आदेश दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.25: कृष्ण द्वारा गोवर्धन-धारण   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 25: कृष्ण द्वारा गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.25.24 
कृष्णयोगानुभावं तं निशम्येन्द्रोऽतिविस्मित: ।
निस्तम्भो भ्रष्टसङ्कल्प: स्वान्मेघान् सन्न्यवारयत् ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
जब इन्द्र ने कृष्ण की योगशक्ति के इस चमत्कार को देखा तो वह आश्चर्यचकित हो उठा। अपने अहंकार के चकनाचूर हो जाने तथा अपने इरादों के टूट जाने से उसने अपने मेघों को रुकने का आदेश दिया।
 
When Indra saw this demonstration of Krishna's yogic powers, he was astonished. With his false pride shattered and his resolutions destroyed, he ordered his clouds to stop.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)