Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.25.21: तुम्हें यह डरने की जरूरत नहीं है कि यह पर्वत मेरे हाथ से छूटकर गिर जाएगा। और हवा और बारिश से डरो मत, क्योंकि इन कष्टों से तुम्हारे छुटकारे की व्यवस्था पहले ही कर दी गई है। | bhagavat अध्याय 10.25: कृष्ण द्वारा गोवर्धन-धारण । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न त्रास इह व: कार्यो मद्धस्ताद्रिनिपातनात् ।
वातवर्षभयेनालं तत्त्राणं विहितं हि व: ॥ २१ ॥
अनुवाद
तुम्हें यह डरने की जरूरत नहीं है कि यह पर्वत मेरे हाथ से छूटकर गिर जाएगा। और हवा और बारिश से डरो मत, क्योंकि इन कष्टों से तुम्हारे छुटकारे की व्यवस्था पहले ही कर दी गई है।
You should not be afraid that this mountain will slip out of my hands and fall. Nor should you be afraid of wind and rain because arrangements have already been made for your deliverance from these troubles.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥