श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 25: कृष्ण द्वारा गोवर्धन-धारण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  10.25.11 
अत्यासारातिवातेन पशवो जातवेपना: ।
गोपा गोप्यश्च शीतार्ता गोविन्दं शरणं ययु: ॥ ११ ॥
 
 
अनुवाद
अत्यधिक वर्षा और हवा के कारण काँपते हुए गोधन और अन्य पशु, व ठंड से परेशान ग्वाले और गोपियाँ—ये सभी सहारे के लिए गोविंद के पास पहुँचे।
 
अत्यधिक वर्षा और हवा के कारण काँपते हुए गोधन और अन्य पशु, व ठंड से परेशान ग्वाले और गोपियाँ—ये सभी सहारे के लिए गोविंद के पास पहुँचे।
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