श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 24: गोवर्धन-पूजा  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  10.24.8 
श्रीनन्द उवाच
पर्जन्यो भगवानिन्द्रो मेघास्तस्यात्ममूर्तय: ।
तेऽभिवर्षन्ति भूतानां प्रीणनं जीवनं पय: ॥ ८ ॥
 
 
अनुवाद
नन्द महाराज ने जवाब दिया: महान इन्द्रदेव बारिश के नियंत्रक हैं। ये बादल उन्हीं के प्रतिनिधि हैं और वही बारिश करवाते हैं जिससे समस्त प्राणियों को सुख और जीवन की प्राप्ति होती है।
 
Nanda Maharaja replied: The great god Indra is the controller of rain. These clouds are his visible representatives and it is he who brings rain which gives happiness and life to all creatures.
तात्पर्य
स्वच्छ वर्षा के पानी के बिना पृथ्वी लोगों को भोजन या पेय पदार्थ उपलब्ध नहीं करा सकती थी, और न ही स्वच्छता रह सकती थी। इस प्रकार वर्षा के मूल्य को आंकना मुश्किल होगा।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)