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श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 24: गोवर्धन-पूजा  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.24.7 
तत्र तावत् क्रियायोगो भवतां किं विचारित: ।
अथवा लौकिकस्तन्मे पृच्छत: साधु भण्यताम् ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
इस स्थिति में, आप इस अनुष्ठान से जुड़े अपने प्रयास को मुझे स्पष्ट रूप से समझाएँ। क्या यह उत्सव शास्त्रों के अनुरूप है या केवल समाज की एक सामान्य प्रथा है?
 
That being the case, please tell me clearly about your ritualistic endeavor. Is this festival in accordance with the scriptures or is it merely a common custom of society?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)