श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 24: गोवर्धन-पूजा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  10.24.2 
तदभिज्ञोऽपि भगवान् सर्वात्मा सर्वदर्शन: ।
प्रश्रयावनतोऽपृच्छद् वृद्धान् नन्दपुरोगमान् ॥ २ ॥
 
 
अनुवाद
सर्वज्ञ होने के कारण भगवान कृष्ण को पहले से ही सारी स्थिति का ज्ञान था, फिर भी उन्होंने अपने पिता नंद महाराज और अन्य गुरुजनों से विनम्रतापूर्वक प्रश्न किया ।
 
Being the omniscient God, Lord Krishna already knew the whole situation, yet in a humble manner He asked his father Nanda Maharaj and other elders.
तात्पर्य
भगवान कृष्ण गोवर्धन पर्वत को उठाने और इंद्र के कपटपूर्ण अभिमान को पराजित करने के अपने मनोरंजक कार्य के लिए उत्सुक थे और इस प्रकार उन्होंने अपने पिता से आगामी यज्ञ के बारे में चतुराई से पूछताछ की।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)