श्रीला जीवा गोस्वामी बताते हैं कि भगवान कृष्ण यह सोच रहे थे, "ये मेरे शाश्वत सहयोगी, जो मेरे पिता और अन्य रिश्तेदारों और दोस्तों के रूप में प्रकट हो रहे हैं, इंद्र की इस पूजा में इतने आकण्ठ क्यों डूबे हुए हैं?" इस प्रकार यद्यपि भगवान का मुख्य उद्देश्य इंद्र के झूठे अभिमान को दूर करना था, फिर भी वे अपने शाश्वत भक्तों को याद दिलाना चाहते थे कि उन्हें अपना ध्यान अन्य तथाकथित देवताओं की ओर नहीं लगाना चाहिए, क्योंकि वास्तव में उनके भक्त पहले से ही सर्वोच्च परम सत्य, स्वयं सर्वशक्तिमान भगवान के साथ रह रहे थे।
