श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 23: ब्राह्मण-पत्नियों को आशीर्वाद  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  10.23.37 
एवं लीलानरवपुर्नृलोकमनुशीलयन् ।
रेमे गोगोपगोपीनां रमयन् रूपवाक्कृतै: ॥ ३७ ॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार अपनी लीलाओं को पूरा करने के लिए मनुष्य के रूप में प्रकट होकर भगवान ने मानव समाज के रीति-रिवाजों का पालन किया। उन्होंने अपनी गायों, चरवाहा मित्रों और गोपियों को अपने सौंदर्य, वाणी और कर्मों से प्रसन्न करते हुए आनंद का भोग किया।
 
In this way, God appeared in human form to complete His pastimes and followed the customs of human society. He enjoyed the company of his cows, cowherd friends and milkmaids by delighting them with His beauty, speech and actions.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)