Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.23.33: मेरे बारे में सुनकर, मेरे विग्रह स्वरूप के दर्शन करके, मेरा ध्यान लगाकर और मेरे नाम तथा महिमा का जप करके मुझसे प्यार बढ़ता है, न कि शारीरिक निकटता से। इसलिए कृपया अपने घरों को लौट जाओ। | bhagavat अध्याय 10.23: ब्राह्मण-पत्नियों को आशीर्वाद । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
श्रवणाद्दर्शनाद्ध्यानान्मयि भावोऽनुकीर्तनात् ।
न तथा सन्निकर्षेण प्रतियात ततो गृहान् ॥ ३३ ॥
अनुवाद
मेरे बारे में सुनकर, मेरे विग्रह स्वरूप के दर्शन करके, मेरा ध्यान लगाकर और मेरे नाम तथा महिमा का जप करके मुझसे प्यार बढ़ता है, न कि शारीरिक निकटता से। इसलिए कृपया अपने घरों को लौट जाओ।
Love for me grows only by hearing about me, seeing my idol form, meditating on me and chanting my names and glories, not by physical proximity. Therefore, you all should return to your homes.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥