श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 23: ब्राह्मण-पत्नियों को आशीर्वाद  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  10.23.24 
तास्तथा त्यक्तसर्वाशा: प्राप्ता आत्मदिद‍ृक्षया ।
विज्ञायाखिलद‍ृग्द्रष्टा प्राह प्रहसितानन: ॥ २४ ॥
 
 
अनुवाद
समस्त प्राणियों के विचारों के साक्षी भगवान कृष्ण जान गए कि किस प्रकार अपनी सारी सांसारिक आशाओं का परित्याग करके वे स्त्रियाँ केवल उन्हें देखने के लिए आई हैं। इसलिए वे मुस्कुराए और उनसे इस प्रकार कहा।
 
Lord Krishna, the witness of the thoughts of all beings, understood how these women had come to see Him only, abandoning all their worldly hopes. So, with a smile on His face, He spoke to them as follows.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)