श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 22: कृष्ण द्वारा अविवाहिता गोपियों का चीरहरण  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  10.22.7 
नद्या: कदाचिदागत्य तीरे निक्षिप्य पूर्ववत् ।
वासांसि कृष्णं गायन्त्यो विजह्रु: सलिले मुदा ॥ ७ ॥
 
 
अनुवाद
एक दिन वे नदी के किनारे आ गईं और, पहले की तरह ही अपने वस्त्र उतारकर, कृष्ण की महिमा गाते हुए आनंद से पानी में खेलने लगीं।
 
One day she came to the bank of the river and taking off her clothes as before, she began to play in the water and sing the praises of Krishna.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर के अनुसार, यह घटना उस दिन हुई थी जिस दिन युवा गोपियों ने अपनी प्रतिज्ञा पूरी की, जो पूर्णिमा का दिन था। अपनी प्रतिज्ञा के सफल समापन का उत्सव मनाने के लिए, लड़कियों ने नवयुवती राधारानी को आमंत्रित किया - जो वृषभानु की बेटी और उनके स्नेह का विशेष पात्र थीं - अन्य महत्वपूर्ण गोपियों के साथ, और उन सभी को स्नान करने के लिए नदी पर ले आईं। पानी में उनका खेलना अवभृथ-स्नान के रूप में था, जो वैदिक यज्ञ के पूर्ण होने पर तुरंत लिया गया एक औपचारिक स्नान था।

श्रील प्रभुपाद इस प्रकार टिप्पणी करते हैं: "भारतीय लड़कियों और महिलाओं के बीच एक पुरानी प्रणाली है कि जब वे नदी में स्नान करती हैं तो वे अपने वस्त्र किनारे पर रखती हैं और पूरी तरह से नग्न होकर पानी में गोता लगाती हैं। नदी का वह भाग जहाँ लड़कियाँ और महिलाएँ स्नान करती थीं, किसी भी पुरुष के लिए सख्त वर्जित था, और अब भी यही प्रणाली है। भगवान का सर्वोच्च व्यक्तित्व, अविवाहित युवा गोपियों के मन को जानकर, उन्हें उनका वांछित उद्देश्य प्रदान किया। उन्होंने कृष्ण से अपने पति बनने की प्रार्थना की थी, और कृष्ण उनकी इच्छाओं को पूरा करना चाहते थे।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)