Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 bhagavat 10.22.5: इस प्रकार उन लड़कियों ने पूरा एक महीना अपना व्रत निभाया और अपने मन को पूरी तरह से कृष्ण में लीन करते हुए इस विचार पर ध्यान केंद्रित रखा कि "राजा नंद का पुत्र मेरा पति बने"। इस प्रकार उन्होंने देवी भद्रकाली की पूजा की। | bhagavat अध्याय 10.22: कृष्ण द्वारा अविवाहिता गोपियों का चीरहरण । bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ । श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एवं मासं व्रतं चेरु: कुमार्य: कृष्णचेतस: ।
भद्रकालीं समानर्चुर्भूयान्नन्दसुत: पति: ॥ ५ ॥
अनुवाद
इस प्रकार उन लड़कियों ने पूरा एक महीना अपना व्रत निभाया और अपने मन को पूरी तरह से कृष्ण में लीन करते हुए इस विचार पर ध्यान केंद्रित रखा कि "राजा नंद का पुत्र मेरा पति बने"। इस प्रकार उन्होंने देवी भद्रकाली की पूजा की।
In this way the girls observed the fast for the whole month and kept their minds fully absorbed in Krishna and concentrated on the thought, “May the son of King Nanda become my husband”, and in this way they worshipped Goddess Bhadrakali.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥