श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 22: कृष्ण द्वारा अविवाहिता गोपियों का चीरहरण  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  10.22.38 
तस्या उपवने कामं चारयन्त: पशून् नृप ।
कृष्णरामावुपागम्य क्षुधार्ता इदमब्रुवन् ॥ ३८ ॥
 
 
अनुवाद
फिर, हे राजन्, सभी ग्वालबाल यमुना के तट पर एक छोटे से जंगल में उन्मुक्त ढंग से पशुओं को चराने लगे। किन्तु शीघ्र ही भूख से परेशान होकर वे कृष्ण तथा बलराम के करीब जाकर बोले।
 
Thereafter, O King, all the cowherd boys started grazing the animals freely in a small forest on the bank of the Yamuna. But soon, distressed by hunger, they went to Krishna and Balarama and spoke thus.
तात्पर्य
श्रील जीव गोस्वामी बताते हैं कि ग्वालबाल चिंतित थे कि कृष्ण को भूख लगेगी। इसलिए उन्होंने अपनी भूख नाटक की ताकि कृष्ण और बलराम खाने का प्रबंध करें।
 
इस प्रकार श्रीमद् भागवतम के स्कन्ध दस के अंतर्गत बाईसवाँ अध्याय समाप्त होता है ।
 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)