कृष्ण: ओ पक्षियों जैसी लड़कियों, यदि तुम यहाँ नहीं आतीं, तो मैं इन कपड़ों को टहनियों में फँसा कर एक झूला और एक झूला-पालना बना लूँगा। मुझे लेटने की ज़रूरत है, क्योंकि मैंने पूरी रात जागकर बिताई है और अब मुझे नींद आ रही है।
गोपियाँ: हमारे प्यारे ग्वाले लड़के, तुम्हारी गायें, घास के लालच में एक गुफा में चली गई हैं। इसलिए तुम्हें जल्दी से वहाँ जाना चाहिए और उन्हें सही रास्ते पर वापस लाना चाहिए।
कृष्ण: अब आओ, मेरी प्यारी ग्वालिन लड़कियों, तुम सबको जल्दी से यहाँ से वृज जाकर अपने घरेलू काम करने चाहिए। अपने माता-पिता और अन्य बड़ों के लिए परेशानी मत बनो।
गोपियाँ: हमारे प्यारे कृष्ण, हम पूरे एक महीने के लिए घर नहीं जाएँगी, क्योंकि हमारे माता-पिता और अन्य बड़ों के आदेश से हम कात्यायनी-व्रत नाम का उपवास कर रही हैं।
कृष्ण: मेरी प्रिय तपस्वी महिलाओं, तुम्हें देखकर मुझे भी गृहस्थ जीवन से वैराग्य की एक अद्भुत भावना होने लगी है। मैं यहाँ एक महीने तक रहकर बादलों में रहने का व्रत करना चाहता हूँ। और अगर तुम मुझ पर दया करो, तो मैं यहाँ से नीचे उतर सकता हूँ और तुम्हारे साथ उपवास का व्रत कर सकता हूँ।
कृष्ण के मज़ाकिया शब्दों से गोपियाँ पूरी तरह से मोहित हो गईं, लेकिन शर्म के मारे उन्होंने अपनी गर्दन तक पानी में डुबो लिया। ठंड से काँपते हुए, उन्होंने कृष्ण को इस प्रकार संबोधित किया।
