श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 22: कृष्ण द्वारा अविवाहिता गोपियों का चीरहरण  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  10.22.13 
एवं ब्रुवति गोविन्दे नर्मणाक्षिप्तचेतस: ।
आकण्ठमग्ना: शीतोदे वेपमानास्तमब्रुवन् ॥ १३ ॥
 
 
अनुवाद
जब श्री गोविन्द ने इस तरह से बात की, तो गोपियाँ उनकी हँसी-ठिठोली भरी बातों से पूरी तरह से मंत्रमुग्ध हो गईं। वे ठंडे पानी में गर्दन तक डूबी हुई काँपने लगीं। इसलिए, उन्होंने उनसे इस प्रकार संबोधित किया।
 
When Shri Govind spoke like this, the minds of the gopis were completely charmed by his funny words (jokes). They started shivering being neck deep in cold water. So they spoke to him like this.
तात्पर्य
श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर कृष्ण और गोपियों के बीच विनोद की निम्नलिखित मिसाल देते हैं।

कृष्ण: ओ पक्षियों जैसी लड़कियों, यदि तुम यहाँ नहीं आतीं, तो मैं इन कपड़ों को टहनियों में फँसा कर एक झूला और एक झूला-पालना बना लूँगा। मुझे लेटने की ज़रूरत है, क्योंकि मैंने पूरी रात जागकर बिताई है और अब मुझे नींद आ रही है।

गोपियाँ: हमारे प्यारे ग्वाले लड़के, तुम्हारी गायें, घास के लालच में एक गुफा में चली गई हैं। इसलिए तुम्हें जल्दी से वहाँ जाना चाहिए और उन्हें सही रास्ते पर वापस लाना चाहिए।

कृष्ण: अब आओ, मेरी प्यारी ग्वालिन लड़कियों, तुम सबको जल्दी से यहाँ से वृज जाकर अपने घरेलू काम करने चाहिए। अपने माता-पिता और अन्य बड़ों के लिए परेशानी मत बनो।

गोपियाँ: हमारे प्यारे कृष्ण, हम पूरे एक महीने के लिए घर नहीं जाएँगी, क्योंकि हमारे माता-पिता और अन्य बड़ों के आदेश से हम कात्यायनी-व्रत नाम का उपवास कर रही हैं।

कृष्ण: मेरी प्रिय तपस्वी महिलाओं, तुम्हें देखकर मुझे भी गृहस्थ जीवन से वैराग्य की एक अद्भुत भावना होने लगी है। मैं यहाँ एक महीने तक रहकर बादलों में रहने का व्रत करना चाहता हूँ। और अगर तुम मुझ पर दया करो, तो मैं यहाँ से नीचे उतर सकता हूँ और तुम्हारे साथ उपवास का व्रत कर सकता हूँ।

कृष्ण के मज़ाकिया शब्दों से गोपियाँ पूरी तरह से मोहित हो गईं, लेकिन शर्म के मारे उन्होंने अपनी गर्दन तक पानी में डुबो लिया। ठंड से काँपते हुए, उन्होंने कृष्ण को इस प्रकार संबोधित किया।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)