श्रील विश्वनाथ चक्रवर्ती ठाकुर ने इस प्रकार टिप्पणी की है: "गोपियों का कहना था, 'हे सखियों, अगर तुम केवल इस भौतिक दुनिया में पारिवारिक जीवन की बेड़ियों में जकड़ी रहोगी, तो तुम क्या देखने को मिलेगा? रचयिता ने हमें ये आँखें दी हैं, तो हमें सबसे अद्भुत चीज़ देखनी चाहिए, जो कि कृष्ण है।"
गोपियों को पता था कि उनकी माँ या अन्य बड़े लोग उनके रोमांटिक शब्दों को सुन सकते हैं और अस्वीकार कर सकते हैं, और इस तरह उन्होंने कहा, अक्षणवताम फलम: "कृष्ण को देखना सभी व्यक्तियों का लक्ष्य है, न कि केवल हमारा।" दूसरे शब्दों में, गोपियों ने संकेत दिया कि चूँकि कृष्ण हर किसी के लिए प्रेम की सर्वोच्च वस्तु हैं, तो वे भी उन्हें आध्यात्मिक परमानंद में क्यों नहीं प्यार कर सकती?
आचार्यों के अनुसार, एक अलग गोपी ने यह और निम्नलिखित प्रत्येक पद (पाठ १९ तक) बोला।
