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bhagavat 10.21.3: जब व्रज ग्राम की जवान औरतों ने कृष्ण जी की मोहक वंशी की धुन सुनी, तो उनमें से कुछ ने चुपके से अपनी सखियों के साथ कृष्ण जी के गुणों का बखान करना शुरू कर दिया।   |   bhagavat अध्याय 10.21: गोपियों द्वारा कृष्ण के वेणुगीत की सराहना   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 21: गोपियों द्वारा कृष्ण के वेणुगीत की सराहना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  10.21.3 
तद् व्रजस्त्रिय आश्रुत्य वेणुगीतं स्मरोदयम् ।
काश्चित्परोक्षं कृष्णस्य स्वसखीभ्योऽन्ववर्णयन् ॥ ३ ॥
 
 
अनुवाद
जब व्रज ग्राम की जवान औरतों ने कृष्ण जी की मोहक वंशी की धुन सुनी, तो उनमें से कुछ ने चुपके से अपनी सखियों के साथ कृष्ण जी के गुणों का बखान करना शुरू कर दिया।
 
When the young women of Vrajagrama heard the song of Krishna's flute, which was arousing, some of them started describing the qualities of Krishna in private to their friends.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)