वृंदावन की झीलें, नदियाँ और पहाड़ फूलों से लदे पेड़ों पर चहचहाते और उड़ान भरते हुए पक्षियों और मधुमक्खियों की आवाज से गूंजायमान थे। ग्वालबालों और बलराम के साथ मधुपति [श्री कृष्ण] ने उस जंगल में प्रवेश किया और गायों को चराते हुए अपनी बांसुरी बजाने लगे।
The lakes, rivers and mountains of Vrindavan were resounding with flocks of frenzied bumblebees and birds hovering over the flowering trees. Madhupati (Sri Krishna) entered the forest with the cowherd boys and Balarama and started playing his flute while grazing the cows.
तात्पर्य
जैसा कि ’चुकूजा वेणुम’ शब्दों से पता चलता है कि भगवान कृष्ण कुशलता से अपनी बाँसुरी के स्वर को वृंदावन के रंग-बिरंगे पक्षियों की मधुर ध्वनियों के साथ मिलाते थे। इस प्रकार एक विलक्षण, स्वर्गीय ध्वनि उत्पन्न हुई।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥