शरद ऋतु के प्रभाव से सभी गायें, हिरणियाँ, महिलाएँ और मादा पक्षी ऋतुमती हो गईं और संभोग सुख की खोज में उनके अपने-अपने जोड़े उनका पीछा करने लगे जिस प्रकार भगवान की सेवा में किए गए कार्य स्वतः ही सभी लाभकारी परिणाम देते हैं।
Due to the influence of autumn, all the cows, deer, women and birds became menstruating and their respective pairs started chasing them in search of sexual pleasure, just as the works done in the service of God automatically give all kinds of beneficial results.
तात्पर्य
श्रील प्रभुपाद टिप्पणी करते हैं, ''शरद ऋतु के आगमन पर, सभी गायें, हिरण, पक्षी और सामान्य रूप से सभी मादाएं गर्भवती हो जाती हैं, क्योंकि उस ऋतु में आम तौर पर सभी पति यौन इच्छा से प्रेरित हो जाते हैं। यह बिल्कुल उन पारलौकिकवादियों की तरह है, जिन्हें परम प्रभु की कृपा से जीवन में अपने गंतव्यों का वरदान दिया जाता है। चैतन्य महाप्रभु के प्रमुख अनुयायी श्रीला रूप गोस्वामी ने अपने उपदेशामृत में निर्देश दिया है कि व्यक्ति को बहुत उत्साह, धैर्य और दृढ़ विश्वास के साथ भक्ति सेवा करनी चाहिए और नियमों और विनियमों का पालन करना चाहिए, अपने आप को भौतिक संदूषण से स्वच्छ रखना चाहिए और भक्तों के साथ जुड़ना चाहिए। इन सिद्धांतों का पालन करके, व्यक्ति को भक्ति सेवा के वांछित परिणाम प्राप्त करने की निश्चितता है। क्योंकि जो धैर्यपूर्वक भक्ति सेवा के नियमित सिद्धांतों का पालन करता है, वह समय आएगा जब वह परिणाम प्राप्त करेगा, जैसे वे पत्नियां जो गर्भवती होकर परिणाम प्राप्त करती हैं।''
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥