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bhagavat 10.20.16: वर्षा ऋतु में मार्गों की सफाई न होने के कारण उन पर घास-फूस और मलबा जम गया, जिससे उन्हें पहचानना कठिन हो गया। ये मार्ग उन धार्मिक ग्रन्थों के समान थे, जिनका अध्ययन ब्राह्मण नहीं करते, इसलिए वे अपवित्र हो गए हैं और समय के साथ उन पर जंग लग गया है।   |   bhagavat अध्याय 10.20: वृन्दावन में वर्षा ऋतु तथा शरद् ऋतु   ।   bhagavat स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ   ।   श्रीमद् भागवतम Srimad Bhagavatam | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 20: वृन्दावन में वर्षा ऋतु तथा शरद् ऋतु  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  10.20.16 
मार्गा बभूवु: सन्दिग्धस्तृणैश्छन्ना ह्यसंस्कृता: ।
नाभ्यस्यमाना: श्रुतयो द्विजै: कालेन चाहता: ॥ १६ ॥
 
 
अनुवाद
वर्षा ऋतु में मार्गों की सफाई न होने के कारण उन पर घास-फूस और मलबा जम गया, जिससे उन्हें पहचानना कठिन हो गया। ये मार्ग उन धार्मिक ग्रन्थों के समान थे, जिनका अध्ययन ब्राह्मण नहीं करते, इसलिए वे अपवित्र हो गए हैं और समय के साथ उन पर जंग लग गया है।
 
Due to the lack of cleaning of the paths during the rainy season, they became covered with grass and garbage and it became difficult to recognize them. These paths were like religious scriptures (Shrutis) that had become corrupted due to not being studied by the Brahmins and had become covered with the passage of time.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)