श्रीमद् भागवतम  »  स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ  »  अध्याय 2: देवताओं द्वारा गर्भस्थ कृष्ण की स्तुति  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  10.2.40 
मत्स्याश्वकच्छपनृसिंहवराहहंस-
राजन्यविप्रविबुधेषु कृतावतार: ।
त्वं पासि नस्त्रिभुवनं च यथाधुनेश
भारं भुवो हर यदूत्तम वन्दनं ते ॥ ४० ॥
 
 
अनुवाद
हे परम नियन्ता, इस संसार की रक्षा के लिए आपने पहले भी मत्स्य, अश्व, कच्छप, नृसिंह, वराह, हंस, भगवान राम, परशुराम और देवताओं में वामन रूप धारण कर अपनी दया दिखाई है। अब आप इस संसार के उत्पातों को कम करके हमारी फिर से रक्षा करें। हे यदुश्रेष्ठ कृष्ण, हम आपको सादर नमस्कार करते हैं।
 
हे परम नियन्ता, इस संसार की रक्षा के लिए आपने पहले भी मत्स्य, अश्व, कच्छप, नृसिंह, वराह, हंस, भगवान राम, परशुराम और देवताओं में वामन रूप धारण कर अपनी दया दिखाई है। अब आप इस संसार के उत्पातों को कम करके हमारी फिर से रक्षा करें। हे यदुश्रेष्ठ कृष्ण, हम आपको सादर नमस्कार करते हैं।
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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