हे प्रभु, आप सदैव ज्ञान से पूर्ण हैं और सभी जीवों का कल्याण करने के लिए आप विविध रूपों में अवतरित होते हैं। ये सभी अवतार भौतिक सृष्टि से परे हैं। जब आप इन अवतारों के रूप में प्रकट होते हैं, तो आप पुण्यात्माओं और धार्मिक भक्तों को प्रसन्न करते हैं, लेकिन जो आपकी भक्ति नहीं करते उनके लिए आप संहारक हैं।
O Lord, You are always full of knowledge and for the welfare of all living entities You appear in various forms that are beyond the material creation. When You appear in these incarnations, You appear attractive to the pious and religious devotees, but to the nondevotees You are the destroyer.
तात्पर्य
इस श्लोक में बताया गया है कि सर्वोच्च भगवान बार-बार अवतार क्यों लेते हैं | भगवान के सभी अवतार अलग-अलग कार्यों को करते हैं किन्तु उनका मुख्य उद्देश्य है -- परित्राणाय साधूनां विनाशाय च दुष्कृताम - यानी भक्तों की रक्षा करना और दुष्टों का विनाश करना | फिर भी दुष्कृत अर्थात दुष्टों का नाश होना अंततः उनके ही भले के लिए है |
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥