ब्रह्माजी और शिवजी, नारद, देवल और व्यास जैसे महान ऋषियों और इंद्र, चंद्र और वरुण जैसे अन्य देवताओं के साथ, अदृश्य रूप में देवकी के कक्ष में पहुँचे, जहाँ वे सभी एक साथ जुड़ गए और वर प्रदान करने वाले भगवान को प्रसन्न करने के लिए आदरपूर्वक स्तुतियाँ कीं।
Brahma and Shiva, along with great sages like Narada, Deval and Vyas and gods like Indra, Chandra and Varuna, reached Devaki's room in invisible form where everyone together offered respectful prayers to please the boon-giving God.
तात्पर्य
इस संसार में दो तरह के जीव होते हैं- दैव और असुर। (पद्म पुराण) दोनों में बहुत अंतर होता है। कंस एक असुर था, जो सदैव भगवान या देवकी को मारने का उपाय सोचता रहता था। इस तरह वो भी कृष्ण-भावना वाला था। पर भक्त लोग कृष्ण-भावना अनुकूल रूप से रखते हैं। (विष्णु-भक्तः स्मृतो दैवः। ) ब्रह्मा जी इतने शक्तिशाली हैं कि पूरी सृष्टि की रचना का भार उन्हीं पर है। फिर भी, वो साक्षात भगवान का अभिनंदन करने आए। भगवान शिव सदैव भगवान के नाम का कीर्तन करते हुए हर्षित रहते हैं। नारद जी की क्या चर्चा करें? नारद-मुनि, बाजाए वीणा, राधिका-रमण-नामे। नारद जी हमेशा भगवान का मंगल-गान करते रहते हैं और संपूर्ण ब्रह्मांड में विचरण करते हुए किसी को भक्त बनाते या ढूंढते हैं। नारद जी की कृपा से एक शिकारी भी भक्त बना। श्रील सनातन गोस्वामी ने अपनी 'तोषणी' में कहा है कि ''नारदादिभिः'' से अर्थ है कि नारद और देवताओं के साथ अन्य संत भी आए थे, जैसे कि सनक और सनातन, ये सभी भगवान का स्वागत या अभिनंदन करने आए थे। यद्यपि कंस देवकी को मारने की योजना बना रहा था, पर वो भी भगवान के आगमन की प्रतीक्षा में था। (प्रतीक्षमंज-जन्म।)
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥