| श्रीमद् भागवतम » स्कन्ध 10: परम पुरुषार्थ » अध्याय 2: देवताओं द्वारा गर्भस्थ कृष्ण की स्तुति » श्लोक 23 |
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| | | | श्लोक 10.2.23  | इति घोरतमाद् भावात् सन्निवृत्त: स्वयं प्रभु: ।
आस्ते प्रतीक्षंस्तज्जन्म हरेर्वैरानुबन्धकृत् ॥ २३ ॥ | | | | | | अनुवाद | | श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा : इस तरह लम्बी बहसों के बाद, कंस, जो भगवान के प्रति शत्रुता रखने पर अड़ा हुआ था, फिर भी अपनी बहन देवकी का क्रूर वध करने से हिचकता रहा। उसने भगवान के जन्म लेने तक इंतजार करने और तब जो उचित लगे वो कार्य करने का मन बना लिया। | | | | श्री शुकदेव गोस्वामी ने कहा : इस तरह लम्बी बहसों के बाद, कंस, जो भगवान के प्रति शत्रुता रखने पर अड़ा हुआ था, फिर भी अपनी बहन देवकी का क्रूर वध करने से हिचकता रहा। उसने भगवान के जन्म लेने तक इंतजार करने और तब जो उचित लगे वो कार्य करने का मन बना लिया। | | ✨ ai-generated | | |
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