"जारे देख, तारे कह 'कृष्ण'-उपदेश |
आमारा आज्ञान्य गुरु हां ता' एई देश ||
"सम्पूर्ण मनुष्यों को भगवान श्री कृष्ण के आदेशों का पालन करने का निर्देश दो जैसा कि उन्होंने भगवद-गीता और श्रीमद्-भागवतम में दिया है | इस प्रकार आध्यात्मिक गुरु बनो और इस देश के सम्पूर्ण मनुष्यों को मुक्त करने का प्रयास करो" (चै.मध्य. 7.128) | यद्यपि भारत के पास भगवद-गीता का उदात्त ज्ञान है, लेकिन भारतीयों ने उसे वितरित करने का अपना उचित कर्तव्य नहीं निभाया है | अब इसलिए कृष्णभावनाभावनामृत आंदोलन को यह ज्ञान यथावत, बिना किसी विकृति के वितरित करने के लिए स्थापित किया गया है | यद्यपि पूर्व में भगवद-गीता के ज्ञान को वितरित करने के प्रयास किए गए थे, लेकिन उन प्रयासों में विकृति और सांसारिक ज्ञान के साथ समझौता किया गया था | लेकिन अब कृष्णभावनाभावनामृत आंदोलन बिना किसी सांसारिक समझौते के भगवद-गीता का वितरण यथावत कर रहा है, और लोग कृष्णभावनाभावनामृत में जागृत होने का लाभ प्राप्त कर रहे हैं और भगवान कृष्ण के भक्त बन रहे हैं | अतः ज्ञान का उचित वितरण आरम्भ हो गया है जिससे न केवल सम्पूर्ण विश्व को लाभ होगा, बल्कि मानव समाज में भारत की गरिमा में भी वृद्धि होगी | कंस ने कृष्णभावनाभावनामृत को अपने घर (भोजेंद्र-गृहे) के भीतर ही रोकने का प्रयास किया, जिसका परिणाम यह निकला कि कंस अपनी सम्पूर्ण सम्पदा के साथ बाद में पराजित हो गया | उसी प्रकार भगवद-गीता के वास्तविक ज्ञान को भारत के बेईमान नेताओं ने दबा दिया था, जिसका परिणाम यह निकला कि भारत की संस्कृति और सर्वोच्च के ज्ञान का लोप हो रहा था | लेकिन अब चूँकि कृष्णभावनाभावनामृत का प्रसार हो रहा है, भगवद-गीता के उचित प्रयोग का प्रयास किया जा रहा है |
